Wednesday, July 4, 2018

सांवली सी लड़की...

दिल तोड़ने का हुनर बेसबब आता है......।
उस सांवली सी लड़की को सब आता है।।
- प्रवीण तिवारी 'रौनक' 

Tuesday, February 6, 2018

गहराई नापनी पड़ती है...

ये शायरी का फ़न मियां ऐसे ही नहीं आया।
दर्द के समंदर की गहराई नापनी पड़ती है।।
- प्रवीण तिवारी 'रौनक'

Monday, November 14, 2016

तेरे तसव्वुर में...

मुझे नींद में मुस्कुराते हुए देखो तो समझ लेना।
तेरे तसव्वुर में हूँ डूबा, तुझसे बातें चल रही हैं।।
प्रवीण तिवारी 'रौनक'

Friday, November 11, 2016

उदासी की धूप में...

तुम्हारी याद के मौसम की एक अदा ये भी है।
आँखे बरस उठती हैं मेरी, उदासी की धूप में।।
- प्रवीण तिवारी 'रौनक'

Friday, October 21, 2016

जल्द फैसला कर...

जिंदगी उलझा मत जल्द फैसला कर।
सहने की सारी हदें अब टूटने लगी हैं।।
-प्रवीण तिवारी 'रौनक'

Wednesday, May 4, 2016

मेरी ज़िंदगी का जल जाना...

रूह  कांप  उठती  है  और  साँसे  भी उखड़ने लगती है।
तेरा किसी का होना मतलब मेरी जिंदगी का जल जाना।।
-प्रवीण तिवारी 'रौनक'

Thursday, April 21, 2016

और के सीने से लगा होना...

क़यामत से आगे भी कोई क़यामत होती है तो हमसे पूछो।
टुकड़ों में कर गया तेरा किसी और के सीने से लगा होना।।
- प्रवीण तिवारी 'रौनक'

Saturday, June 13, 2015

मुझे इज़ाजत तो दो...

एक बार तुम गले लगाने की मुझे इज़ाजत तो दो।
सारी शिकायते तेरे काँधे से होकर गुज़र जाएँगी।।
-प्रवीण तिवारी 'रौनक'

Thursday, June 11, 2015

सर झुकाए बैठे हैं...

ये लब ख़ामोश ही रहेंगे की इनमें जान न बची।
हम ज़िन्दगी के मुहाने पर सर झुकाए बैठे हैं।।
-प्रवीण तिवारी 'रौनक'

Wednesday, April 8, 2015

ज़रूरत भी क्या...

मौत इतनी साजिशों की, तुझे जरुरत भी क्या।
मैं  तैयार  तो  हूँ  न,  तेरे  साथ चलने के लिए।
-प्रवीण तिवारी 'रौनक'

Sunday, April 5, 2015

वक़्त लगेगा कभी...

ऐ-खुदा तेरे पास आने में, ज़रा वक़्त लगेगा अभी।
उन्हें  रूठा  हुआ  छोड़कर,  कहीं गया नहीं कभी।
-प्रवीण तिवारी 'रौनक'

Sunday, December 7, 2014

कोई भूल पाता है...

कोई   भूल  पाता  है  किसी  को भुलाने से। 
ये   बात   पूछो   तुम   किसी   दिवाने   से।
 

मेरी खामोशियों पर यूं न उंगलियां उठाओ,
मैं   तन्हा   हूं   पिछले   कई   जमाने   से।
 

कल   रात   मुझे  नींद  बहुत  अच्छी  आई,
किसी    रूठे    हुए    के    मान    जाने    से।

तुम  पर  शक  की  कोई  गुंजाईश न रहेगी,
तुम   पास   तो   आओ   किसी   बहाने   से।
 

तबीयत   मेरी   फिर   हरी   सी   हो   गयी,
सिर्फ    तेरे    एक    बार    मुस्कुराने    से।
 

तेरे   गम   को   मैंने   हावी  न  होने  दिया,
जाकर   मैं   लौट   आया   हूं   मैखाने   से।


खुदा    महफूज    रखे    ऐसे    लोगो    को,
जो   हँस   पड़ते  हैं  किसी  के  हँसाने  से।
  
तुझे   खोने   का   दर्द   आज  भी  जिंदा  है,
खुदा   बचाए   मुझे   लोगो   के   ताने  से।

इत्र   की   तरह   वो   मुझमें   महकता  है,
एक  बार  छू  लिया  था  जिसे अंजाने से।
 

-प्रवीण तिवारी ‘रौनक’

Thursday, November 20, 2014

बहुत गुमान है तुम्हें  अपनी आँखों पर। 
जा हमने आज से पीना ही छोड़ दिया। 
-प्रवीण तिवारी 'रौनक'
तुम्हारी मोहब्बत मिले तो ख़ुशी भी होगी और ये ग़म भी।
मेरे   ज़ेहन   से   ग़ज़लों   का   हुनर   चला   जायेगा।।
-प्रवीण तिवारी 'रौनक'

Tuesday, June 10, 2014

जीने का बहाना नहीं आया.....

ख्वाबों को हकीकत में मिलाना नहीं आया।
मुझे  जिंदगी  जीने  का  बहाना नहीं आया।

सरकते   न  आँसू  आँखों  की दहलीज से।
तेरी यादों को ठीक से सहलाना नहीं आया।

रात   सूना   रहा   मेरी  उम्मीदों  का आँगन।
आज  कोई  ख्वाब  तेरा सुहाना नहीं आया।

रूठी  धड़कनो  की  हसरतें  हो  जाती पूरी।
तुम्हें  सलीके  से  गले  लगाना  नहीं  आया।

थामा  ही  नहीं  तुमने  इशारों  की  डोर  को।
मुझे    ही   कोई   बात  बताना  नहीं  आया।

तुम   न   जाते   तो भला  और  क्या  करते।
मुझे   ही   साथ   तेरा  निभाना  नहीं  आया।

झूठी  तसल्ली  ही  सही  कुछ  तो  मिलता।
तक़दीर     तुझे     बहलाना    नहीं    आया।

हम   सोए   ऐसा   की   फिर   उठे   ही नहीं।
माँ  की  तरह  किसी को जगाना नहीं आया।
-प्रवीण तिवारी 'रौनक'

Sunday, March 30, 2014

तेरे हाथों को छुए ...

''तेरे हाथों को छुए ज़माने हो गए।
मैं तेरा था कभी,ये किस्से अब पुराने हो गये॥
हवाओं की तरह तुमने रुख मोड़ लिया है मुझसे,
टूट कर ऐसे बिखरे की फ़िर खाने खाने हो गए। "
-प्रवीण तिवारी 'रौनक'

Wednesday, December 11, 2013

चाह ने जिन्दा रखा है...

तुझे खोने का इल्म है हमें मगर। 
तुझे पाने की चाह ने जिन्दा रखा है। 
- प्रवीण तिवारी 'रौनक'

लबों पर प्यास रहती है...

हाथ दिल पर, लबों पर प्यास रहती है।
कुछ इस कदर, तुझे पाने की आस रहती है।
-प्रवीण तिवारी 'रौनक ' 

हिन्द की शान है हिंदी.....(14 sep)

हिन्द की शान है हिंदी तो हिंदुस्तान कि निशानी है
शहीदों का अभिमान हिंदी तो शूरवीरों कि कहानी है
शरीर में लहू बनकर जिनके दौड़ती है नस नस में,
 उन बेटों कि माँ है हिंदी, उन युवाओं की जवानी है
-प्रवीण तिवारी 'रौनक'