दूर हो जायेंगे हम दुनिया की हर एक खुशी से,
अपना दर्द समेट लेंगे न बोलेंगे किसी से।
तुम्हे नाराज होने की अब कोई जरुरत नहीं है,
खुद ही चले जायेंगे हम तुम्हारी जिंदगी से।...............प्रवीण तिवारी 'रौनक'
Monday, January 30, 2012
कई शाम गुजार दी हमने...
बस इस इंतज़ार में कई शाम गुजार दी हमने,
एक दिन कहा था उसने की शाम को बात करेंगे।........प्रवीण तिवारी 'रौनक'
एक दिन कहा था उसने की शाम को बात करेंगे।........प्रवीण तिवारी 'रौनक'
Wednesday, January 4, 2012
लगता है मां आज मैं भूखा ही रह जाउंगा...
मां आज तुम फिर गांव को चली जाओगी।
तुम्हारें बिन मैं एक पल भी न रह पाउंगा।
लगता है मां आज मैं भूखा ही रह जाउंगा।।
तुम बिन मां ये घर काटने को दौड़ता है।
तनहा सा रहता हूं, हर दिन अखरता है।।
बिन तेरी आवाज मैं कैसे सुबह उठ पाउंगा।
लगता है मां आज मैं भूखा ही रह जाउंगा।।
सुबह ‘रौनक’ इक आवाज सी आएगी।
स्नेह भरी खाने की थाली पड़ोस से आएगी।।
तेरे बिन मां मैं एक निवाला भी न खा पाउगां।
लगता है मां आज मैं भूखा ही रह जाउंगा।।
तेरे न होने पर मौसी का खूब दुलार मिलता है।
सुबह हो या हो शाम स्वादिष्ट आहार मिलता है।।
उनके इस कर्ज को मां मैं कैसे चुका पाउंगा।
लगता है मां आज मैं भूखा ही रह जाउंगा।।
तुम बिन मां ये जिंदगी मजबूरी लगती है।
तेरे हाथों से सूखी रोटी भी मां पूरी लगती है।।
उन हाथों के एक निवाले को मैं तरस जाउंगा
लगता है मां आज मैं भूखा ही रह जाउंगा।
तुम्हें याद करके मैं बहुत रोता हंू।
तुम बिन मां मैं कहां तनिक भी सोता हूं।।
तेरी रातों की लोरी को सोचकर ही रह जाउंगा।।
लगता है मां आज मैं भूखा ही रह जाउंगा।।
तुम जैसा मां कोई भी अपना नहीं है।
तुम नहीं हो मां तो कोई सपना नहीं है।।
कदम अपने लक्ष्य की ओर कैसे बढ़ा पाउंगा।
लगता है मां आज मैं भूखा ही रह जाउंगा।।
-प्रवीण तिवारी ‘रौनक’
तुम्हारें बिन मैं एक पल भी न रह पाउंगा।
लगता है मां आज मैं भूखा ही रह जाउंगा।।
तुम बिन मां ये घर काटने को दौड़ता है।
तनहा सा रहता हूं, हर दिन अखरता है।।
बिन तेरी आवाज मैं कैसे सुबह उठ पाउंगा।
लगता है मां आज मैं भूखा ही रह जाउंगा।।
सुबह ‘रौनक’ इक आवाज सी आएगी।
स्नेह भरी खाने की थाली पड़ोस से आएगी।।
तेरे बिन मां मैं एक निवाला भी न खा पाउगां।
लगता है मां आज मैं भूखा ही रह जाउंगा।।
तेरे न होने पर मौसी का खूब दुलार मिलता है।
सुबह हो या हो शाम स्वादिष्ट आहार मिलता है।।
उनके इस कर्ज को मां मैं कैसे चुका पाउंगा।
लगता है मां आज मैं भूखा ही रह जाउंगा।।
तुम बिन मां ये जिंदगी मजबूरी लगती है।
तेरे हाथों से सूखी रोटी भी मां पूरी लगती है।।
उन हाथों के एक निवाले को मैं तरस जाउंगा
लगता है मां आज मैं भूखा ही रह जाउंगा।
तुम्हें याद करके मैं बहुत रोता हंू।
तुम बिन मां मैं कहां तनिक भी सोता हूं।।
तेरी रातों की लोरी को सोचकर ही रह जाउंगा।।
लगता है मां आज मैं भूखा ही रह जाउंगा।।
तुम जैसा मां कोई भी अपना नहीं है।
तुम नहीं हो मां तो कोई सपना नहीं है।।
कदम अपने लक्ष्य की ओर कैसे बढ़ा पाउंगा।
लगता है मां आज मैं भूखा ही रह जाउंगा।।
-प्रवीण तिवारी ‘रौनक’
Friday, December 30, 2011
बेटी न होगी फिर ये संसार भी न होगा...
''बेटी न होगी फिर ये संसार भी न होगा,
मात-पिता के आंशुओं का कोई खरीदार न होगा।
जिसकी आहट से चहेक उठती है भाई की कलाई,
वो बहन भी न होगी फिर वो प्यार भी न होगा। ''
- प्रवीण तिवारी 'रौनक'
मात-पिता के आंशुओं का कोई खरीदार न होगा।
जिसकी आहट से चहेक उठती है भाई की कलाई,
वो बहन भी न होगी फिर वो प्यार भी न होगा। ''
- प्रवीण तिवारी 'रौनक'
Saturday, December 17, 2011
जिंदगी को सजा दिया है तुमने...
''जिंदगी को सजा दिया है तुमने,
फिर क्यूँ भुला दिया है तुमने।
तुम्हारा प्यार न सही इतना तो मिल गया हमको,
जिन्दगी जीने का सलीका सिखा दिया है तुमने। ''
फिर क्यूँ भुला दिया है तुमने।
तुम्हारा प्यार न सही इतना तो मिल गया हमको,
जिन्दगी जीने का सलीका सिखा दिया है तुमने। ''
-प्रवीण तिवारी 'रौनक
Monday, December 12, 2011
तेरे अक्स को पाया है बहुत...
''तनहा जिंदगी ने खोया है बहुत ,
तुझसे बिछड़ के कोई रोया है बहुत।
राहों में चलना भी हुआ है मुश्किल,
हर कदम तेरे अक्स को पाया है बहुत। ''
- प्रवीण तिवारी 'रौनक'
तुझसे बिछड़ के कोई रोया है बहुत।
राहों में चलना भी हुआ है मुश्किल,
हर कदम तेरे अक्स को पाया है बहुत। ''
- प्रवीण तिवारी 'रौनक'
Wednesday, December 7, 2011
मुसकुराहट चुराना सीख लिया...
''अंधेरों में हमने आशियाना बनाना सीख लिया ,
तेरी यादों से मुसकुराहट चुराना सीख लिया ।
तुम्हारी एक झलक ने कितनी तसल्ली दी है मुझे,
आँखों से हमने लबों को बताना सीख लिया । ''
- प्रवीण तिवारी 'रौनक'
तेरी यादों से मुसकुराहट चुराना सीख लिया ।
तुम्हारी एक झलक ने कितनी तसल्ली दी है मुझे,
आँखों से हमने लबों को बताना सीख लिया । ''
- प्रवीण तिवारी 'रौनक'
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