Thursday, June 28, 2012

एक अंजान कांधों पर तुम्हारा सर होगा...


वो एक बात जो मेरी आंखो से नींदे चुरा लेती है।
कि एक दिन वो पल भी आएगा।

जब एक अजनबी तुम्हारी मांग सजाएगा।।

फिर एक गैर की बाँहों में मेरा मुकद्दर होगा ।

और एक अंजान कांधों पर तुम्हारा सर होगा।।


तुम
अमानत किसी और की हो जाओगी।
न समझती हो मुझे न ही कभी चाहोगी।।

ऐसे गुजरेगा वक्त, कि सारा आलम बेखबर होगा।

और एक अंजान कांधो पर तुम्हारा सर होगा।।


तेरे
लौट आने की फिर कोई गंुजाइश न रहेगी।
की जैसे जिंदगी में तब कोई ख्वाहिश न रहेगी।।

उदासी चेहरे पर इन आंखों में समदंर होगा।

और एक अंजान कांधों पर तुम्हारा सर होगा।।
-
प्रवीण
तिवारी ‘रौनक

Saturday, May 19, 2012

अब वो आहट कहाँ...

तुझसे मिलने पर अब वो राहत कहाँ
तेरी बातों में अब वो चाहत कहाँ
दिल धड़कता है तो धड़कने भी दो,
इन धड़कनों में अब वो आहट कहाँ
-प्रवीण तिवारी 'रौनक'

Thursday, May 17, 2012

एक आदत माँ के पाँव छूने की...

जन्नत के प्रहरी भी उनके स्वागत को बेताब होंगे।
सुबह माँ के पाँव छूने की जिन्हें आदत सी हो गयी है।
-प्रवीण तिवारी 'रौनक'

Monday, April 23, 2012

न ही तुझे भुलायेंगे...

दिल को समझाया बहुत फिर दिल को समझायांगे.
अब न ही तुझको याद करेंगे, न ही तुझे भुलायेंगे.
- प्रवीण तिवारी 'रौनक'
 

Sunday, April 22, 2012

माँ के पैरो से खुलता है...

न अपनों से खुलता है, न ही गैरों से खुलता है.
ये जन्नत का दरवाज़ा है, माँ के पैरो से खुलता है.................प्रवीण तिवारी 'रौनक' 

Saturday, April 14, 2012

खुद से ये सवाल करते हैं...

अक्सर खुद से ये सवाल करते हैं ,
वो हमसे क्यूँ नहीं प्यार करते हैं
बहुत संभलकर बात करते हैं वो,
जब कभी हम उनसे बात करते है।
- प्रवीण तिवारी 'रौनक'

Tuesday, April 10, 2012

तेरी याद में हम जागे इस कदर...

कल रात तेरी याद में हम जागे इस कदर,
की नींदो ने आँखों से बेवफाई कर ली
-प्रवीण तिवारी 'रौनक'