Thursday, March 8, 2012

ये कोई उम्मीद न लगा बैठे...

मेरे आने की खबर को वो भुला बैठे,
फिर अपनी हर एक चाहत को हम छुपा बैठे।
बस इस डर से वो बात करते नहीं हमसे,
की कही फिर ये कोई उम्मीद लगा बैठे।
-प्रवीण तिवारी 'रौनक'

सारे रास्ते बदल गए...

अपनी सब बातें वो नफरतों में बदल गए,
मेरे करीब रहने की सारी आदतें बदल गए।
अब किस और जाये इसी असमंजस में है हम,
एक उनको ही पाने के सारे रास्ते बदल गए।
-
प्रवीण तिवारी 'रौनक'

हल्का सा मुस्कुरा लिया हमने...

अपने दर्द को हमसफ़र बना लिया हमने,
इस राज को सबसे छुपा लिया हमने
जो कहीं तेरा नाम लिखा देखा,
बस हल्का सा मुस्कुरा लिया हमने
-प्रवीण तिवारी 'रौनक'

आँखों से पानी छोड़ दिया हमने...

तेरे होने की एक निशानी छोड़ दिया हमने,
तू मेरा नहीं है सबसे जुबानी बोल दिया हमने
तुमने कसम खायी थी मुझसे प्यार करने की,
ये पता चलते ही आँखों से पानी छोड़ दिया हमने
- प्रवीण तिवारी 'रौनक'

Monday, January 30, 2012

चले जायेंगे हम तुम्हारी जिंदगी से...

दूर हो जायेंगे हम दुनिया की हर एक खुशी से,
अपना दर्द समेट लेंगे बोलेंगे किसी से
तुम्हे नाराज होने की अब कोई जरुरत नहीं है,
खुद ही चले जायेंगे हम तुम्हारी जिंदगी से।...............प्रवीण तिवारी 'रौनक'

कई शाम गुजार दी हमने...

बस इस इंतज़ार में कई शाम गुजार दी हमने,
एक दिन कहा था उसने की शाम को बात करेंगे।........प्रवीण तिवारी 'रौनक'

Wednesday, January 4, 2012

लगता है मां आज मैं भूखा ही रह जाउंगा...

मां आज तुम फिर गांव को चली जाओगी।
तुम्हारें बिन मैं एक पल भी न रह पाउंगा।
लगता है मां आज मैं भूखा ही रह जाउंगा।।

तुम बिन मां ये घर काटने को दौड़ता है।
तनहा सा रहता हूं, हर दिन अखरता है।।
बिन तेरी आवाज मैं कैसे सुबह उठ पाउंगा।
लगता है मां आज मैं भूखा ही रह जाउंगा।।

सुबह ‘रौनक’ इक आवाज सी आएगी।
स्नेह भरी खाने की थाली पड़ोस से आएगी।।
तेरे बिन मां मैं एक निवाला भी न खा पाउगां।
लगता है मां आज मैं भूखा ही रह जाउंगा।।

तेरे न होने पर मौसी का खूब दुलार मिलता है।
सुबह हो या हो शाम स्वादिष्ट आहार मिलता है।।
उनके इस कर्ज को मां मैं कैसे चुका पाउंगा।
लगता है मां आज मैं भूखा ही रह जाउंगा।।

तुम बिन मां ये जिंदगी मजबूरी लगती है।
तेरे हाथों से सूखी रोटी भी मां पूरी लगती है।।
उन हाथों के एक निवाले को मैं तरस जाउंगा
लगता है मां आज मैं भूखा ही रह जाउंगा।


तुम्हें याद करके मैं बहुत रोता हंू।
तुम बिन मां मैं कहां तनिक भी सोता हूं।।
तेरी रातों की लोरी को सोचकर ही रह जाउंगा।।
लगता है मां आज मैं भूखा ही रह जाउंगा।।

तुम जैसा मां कोई भी अपना नहीं है।
तुम नहीं हो मां तो कोई सपना नहीं है।।
कदम अपने लक्ष्य की ओर कैसे बढ़ा पाउंगा।
लगता है मां आज मैं भूखा ही रह जाउंगा।।
-प्रवीण तिवारी ‘रौनक’