मेरी सारी बातों को वो दिल से निकाल देता है।
बड़ी कोशिशों के बाद मुझे वो अपना हाल देता है॥
एक बात जो लबों पर बसी है, मैं उससे कहूँ कैसे,
मेरी एसी बातों को वो हंसी में टाल देता है।
तमाम लम्हें गुजारे मैंने उसे अपना बनाने में लेकिन,
मेरे हर एक जवाब पे मुझे वो कई सवाल देता है।
उसकी आहट की दीवानगी इस कदर है मेरे जेहन में,
की कही भी होता है मुझे वो अपना ख्याल देता है।
जिसकी हैसियत भी नहीं है काटों के लायक,
ये खुदा क्यूँ उसको ताजा कवँल देता है।
- प्रवीण तिवारी 'रौनक'
Sunday, October 23, 2011
Thursday, October 20, 2011
माँ की दुवाओं का असर...
''गर देखना है मेरी माँ की दुवाओं का असर,
तो मुश्किलों में मुझसे कभी मुलाकात कर लेना।
खुद बा खुद पता चल जायेगा उन्हें, जो कहते थे,
तकलीफ हो जरा सी तो खुदा से बात कर लेना। ''
- प्रवीण तिवारी 'रौनक'
तो मुश्किलों में मुझसे कभी मुलाकात कर लेना।
खुद बा खुद पता चल जायेगा उन्हें, जो कहते थे,
तकलीफ हो जरा सी तो खुदा से बात कर लेना। ''
- प्रवीण तिवारी 'रौनक'
Saturday, October 8, 2011
तुम्हारी एक दस्तक...
''तुम्हारी एक दस्तक ने नयी जिंदगी दी है मुझे,
इसी ख़ुशी में कई दिन गुजर गये तेरे बगैर।
कमबख्त ये आँशु फिर आगए मेरी पलकों पे,
और कहने लगे मुझसे,रुकने वाले नहीं हम उसके बगैर। ''
- प्रवीण तिवारी 'रौनक'
इसी ख़ुशी में कई दिन गुजर गये तेरे बगैर।
कमबख्त ये आँशु फिर आगए मेरी पलकों पे,
और कहने लगे मुझसे,रुकने वाले नहीं हम उसके बगैर। ''
- प्रवीण तिवारी 'रौनक'
Tuesday, October 4, 2011
रूठा है तेरा हाथ मेरे हाथ से...
''अब तो हथेलियों में सनसनाहट सी होने लगी है,
की जबसे रूठा है तेरा हाथ मेरे हाथ से।...........''
- प्रवीण तिवारी 'रौनक'
की जबसे रूठा है तेरा हाथ मेरे हाथ से।...........''
- प्रवीण तिवारी 'रौनक'
Monday, October 3, 2011
चले थे डायरी लिखने शायरी लिख गए...
''सोचा की,जिंदगी के कुछ लम्हों को कैद कर लूं शब्दों में,
इसी जद्दोजहद में चले थे डायरी लिखने,शायरी लिख गए। ''
- प्रवीण तिवारी 'रौनक'
इसी जद्दोजहद में चले थे डायरी लिखने,शायरी लिख गए। ''
- प्रवीण तिवारी 'रौनक'
Thursday, September 29, 2011
लम्हों को याद कर लेते है.....
तुमसे जब कभी मुलाकात करनी होती है मुझे,
तेरे साथ बिताये लम्हों को याद कर लेते हैं।
तुमसे जब कभी बात करनी होती है मुझे,
तेरी तस्वीर को अक्सर हम पास बुला लेते हैं।
तुमसे जब कभी कोई शिकायत करनी होती है मुझे,
खुद से ही अपने जज्बात बयाँ कर लेते हैं।
तुम्हारे साथ जब कभी कुछ पल बिताना होता है मुझे,
अपने खवाबों में जाते है और तेरे साथ हो लेते हैं।..............................प्रवीण तिवारी 'रौनक'
तेरे साथ बिताये लम्हों को याद कर लेते हैं।
तुमसे जब कभी बात करनी होती है मुझे,
तेरी तस्वीर को अक्सर हम पास बुला लेते हैं।
तुमसे जब कभी कोई शिकायत करनी होती है मुझे,
खुद से ही अपने जज्बात बयाँ कर लेते हैं।
तुम्हारे साथ जब कभी कुछ पल बिताना होता है मुझे,
अपने खवाबों में जाते है और तेरे साथ हो लेते हैं।..............................प्रवीण तिवारी 'रौनक'
Tuesday, September 27, 2011
अनदेखियों ने.....
''उसकी अनदेखियों ने कोरा कागज़ कर दिया मुझे।
हर रोज नए प्रश्न लिखे जाते हैं मुझ पर॥ ''
- प्रवीण तिवारी 'रौनक'
हर रोज नए प्रश्न लिखे जाते हैं मुझ पर॥ ''
- प्रवीण तिवारी 'रौनक'
Subscribe to:
Posts (Atom)