तेरे इनकार के बाद...
(काव्य संग्रह) -प्रवीण तिवारी 'रौनक'
Friday, October 21, 2016
जल्द फैसला कर...
जिंदगी उलझा मत जल्द फैसला कर।
सहने की सारी हदें अब टूटने लगी हैं।।
-प्रवीण तिवारी 'रौनक'
Wednesday, May 4, 2016
मेरी ज़िंदगी का जल जाना...
रूह कांप उठती है और साँसे भी उखड़ने लगती है।
तेरा किसी का होना मतलब मेरी जिंदगी का जल जाना।।
-प्रवीण तिवारी 'रौनक'
Thursday, April 21, 2016
और के सीने से लगा होना...
क़यामत से आगे भी कोई क़यामत होती है तो हमसे पूछो।
टुकड़ों में कर गया तेरा किसी और के सीने से लगा होना।।
- प्रवीण तिवारी 'रौनक'
Saturday, June 13, 2015
मुझे इज़ाजत तो दो...
एक बार तुम गले लगाने की मुझे इज़ाजत तो दो।
सारी शिकायते तेरे काँधे से होकर गुज़र जाएँगी।।
-प्रवीण तिवारी 'रौनक'
Thursday, June 11, 2015
सर झुकाए बैठे हैं...
ये लब ख़ामोश ही रहेंगे की इनमें जान न बची।
हम ज़िन्दगी के मुहाने पर सर झुकाए बैठे हैं।।
-प्रवीण तिवारी 'रौनक'
Wednesday, April 8, 2015
ज़रूरत भी क्या...
मौत इतनी साजिशों की, तुझे जरुरत भी क्या।
मैं तैयार तो हूँ न, तेरे साथ चलने के लिए।
-प्रवीण तिवारी 'रौनक'
Sunday, April 5, 2015
वक़्त लगेगा कभी...
ऐ-खुदा तेरे पास आने में, ज़रा वक़्त लगेगा अभी।
उन्हें रूठा हुआ छोड़कर, कहीं गया नहीं कभी।
-प्रवीण तिवारी 'रौनक'
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