Saturday, June 13, 2015

मुझे इज़ाजत तो दो...

एक बार तुम गले लगाने की मुझे इज़ाजत तो दो।
सारी शिकायते तेरे काँधे से होकर गुज़र जाएँगी।।
-प्रवीण तिवारी 'रौनक'

Thursday, June 11, 2015

सर झुकाए बैठे हैं...

ये लब ख़ामोश ही रहेंगे की इनमें जान न बची।
हम ज़िन्दगी के मुहाने पर सर झुकाए बैठे हैं।।
-प्रवीण तिवारी 'रौनक'

Wednesday, April 8, 2015

ज़रूरत भी क्या...

मौत इतनी साजिशों की, तुझे जरुरत भी क्या।
मैं  तैयार  तो  हूँ  न,  तेरे  साथ चलने के लिए।
-प्रवीण तिवारी 'रौनक'

Sunday, April 5, 2015

वक़्त लगेगा कभी...

ऐ-खुदा तेरे पास आने में, ज़रा वक़्त लगेगा अभी।
उन्हें  रूठा  हुआ  छोड़कर,  कहीं गया नहीं कभी।
-प्रवीण तिवारी 'रौनक'

Sunday, December 7, 2014

कोई भूल पाता है...

कोई   भूल  पाता  है  किसी  को भुलाने से। 
ये   बात   पूछो   तुम   किसी   दिवाने   से।
 

मेरी खामोशियों पर यूं न उंगलियां उठाओ,
मैं   तन्हा   हूं   पिछले   कई   जमाने   से।
 

कल   रात   मुझे  नींद  बहुत  अच्छी  आई,
किसी    रूठे    हुए    के    मान    जाने    से।

तुम  पर  शक  की  कोई  गुंजाईश न रहेगी,
तुम   पास   तो   आओ   किसी   बहाने   से।
 

तबीयत   मेरी   फिर   हरी   सी   हो   गयी,
सिर्फ    तेरे    एक    बार    मुस्कुराने    से।
 

तेरे   गम   को   मैंने   हावी  न  होने  दिया,
जाकर   मैं   लौट   आया   हूं   मैखाने   से।


खुदा    महफूज    रखे    ऐसे    लोगो    को,
जो   हँस   पड़ते  हैं  किसी  के  हँसाने  से।
  
तुझे   खोने   का   दर्द   आज  भी  जिंदा  है,
खुदा   बचाए   मुझे   लोगो   के   ताने  से।

इत्र   की   तरह   वो   मुझमें   महकता  है,
एक  बार  छू  लिया  था  जिसे अंजाने से।
 

-प्रवीण तिवारी ‘रौनक’

Thursday, November 20, 2014

बहुत गुमान है तुम्हें  अपनी आँखों पर। 
जा हमने आज से पीना ही छोड़ दिया। 
-प्रवीण तिवारी 'रौनक'
तुम्हारी मोहब्बत मिले तो ख़ुशी भी होगी और ये ग़म भी।
मेरे   ज़ेहन   से   ग़ज़लों   का   हुनर   चला   जायेगा।।
-प्रवीण तिवारी 'रौनक'