Monday, April 23, 2012

न ही तुझे भुलायेंगे...

दिल को समझाया बहुत फिर दिल को समझायांगे.
अब न ही तुझको याद करेंगे, न ही तुझे भुलायेंगे.
- प्रवीण तिवारी 'रौनक'
 

Sunday, April 22, 2012

माँ के पैरो से खुलता है...

न अपनों से खुलता है, न ही गैरों से खुलता है.
ये जन्नत का दरवाज़ा है, माँ के पैरो से खुलता है.................प्रवीण तिवारी 'रौनक' 

Saturday, April 14, 2012

खुद से ये सवाल करते हैं...

अक्सर खुद से ये सवाल करते हैं ,
वो हमसे क्यूँ नहीं प्यार करते हैं
बहुत संभलकर बात करते हैं वो,
जब कभी हम उनसे बात करते है।
- प्रवीण तिवारी 'रौनक'

Tuesday, April 10, 2012

तेरी याद में हम जागे इस कदर...

कल रात तेरी याद में हम जागे इस कदर,
की नींदो ने आँखों से बेवफाई कर ली
-प्रवीण तिवारी 'रौनक'

Tuesday, March 27, 2012

तेरी जुल्फे हम क्या...

तेरी जुल्फें हम क्या सुलझाने लगे हैं।
लोग उलझने लेकर पास आने लगे हैं।
-प्रवीण तिवारी 'रौनक'

कुछ शेर तन्हा रातों के नाम...

ये सोचकर की खुश हूं मैं उनके बेगैर,
वो अंदाजा लगाने लगे मेरी मोहब्बत का।
उनकी याद में आंसूओं ने सफर तय किया मेरे सिरहाने तक,
तब कहीं जाकर ख्वाब तर हुए, और मजा आया है सोने का।
-प्रवीण तिवारी 'रौनक'

कुछ शेर तन्हा रातों के नाम...

दर्द आंखो में लेकर हम जिए जा रहे,
आंसू बनकर हैं जो आखों से बहे जा रहे।
तेरे बैगेर ऐसे कटता है एक एक लम्हा हमारा,
अजनबी बनकर जैसे अंधेरों में रहे जा रहे।
-प्रवीण तिवारी 'रौनक'