ये सोचकर की खुश हूं मैं उनके बेगैर, वो अंदाजा लगाने लगे मेरी मोहब्बत का। उनकी याद में आंसूओं ने सफर तय किया मेरे सिरहाने तक, तब कहीं जाकर ख्वाब तर हुए, और मजा आया है सोने का। -प्रवीण तिवारी 'रौनक'
दर्द आंखो में लेकर हम जिए जा रहे, आंसू बनकर हैं जो आखों से बहे जा रहे। तेरे बैगेर ऐसे कटता है एक एक लम्हा हमारा, अजनबी बनकर जैसे अंधेरों में रहे जा रहे। -प्रवीणतिवारी 'रौनक'